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एक करोड़ नौकरियां कब मिलेंगी?

akb दिल्ली के त्यागराज स्टेडियम में दिल्ली सरकार ने 7-8 नवंबर को रोज़गार मेला लगाया था. वहां लोगों की भीड़ देख कर समझ आया कि इसे स्टेडियम में आयोजित करने की ज़रूरत क्यों पड़ी. कई प्राइवेट कंपनियों के काउंटर्स वहां लगे थे और उनके सामने नौकरी की आस में युवाओं की लम्बी कतारें. बेरोज़गारी के आंकड़ें सामने दिखाई दे रहे थे. 'चपरासी की नौकरी के लिए भी तैयार हूं' ओडिशा के संजय कुमार बताते हैं कि वो 2013 से नौकरी की तलाश में हैं. पहले 2 साल भुवनेश्वर में नौकरी खोजी और थक-हार कर दिल्ली का रुख किया. यहाँ भी 2 साल से नौकरी के लिए मारे-मारे फिरते हैं. सरकारी नौकरी के लिए 15-20 फॉर्म भी भर चुके हैं. "ग्रेजुएट ही हैं तो चपरासी की नौकरी ही मिलेगी... रोज़ी-रोटी के लिए तो कुछ भी करना पड़ेगा." भाई की एक दुर्घटना में मौत होने के बाद माली हालत ठीक नहीं है और घर पर 3-4 लाख का क़र्ज़ भी है. माँ-बाप ने तो कहा था कि आगे पढ़ लो लेकिन घर के हालात देखते हुए खुद संजय ने ही मना कर दिया. .

3 दिन पहले भोपाल में केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने मीडिया के सामने कहा था कि जो लोग वक्त के साथ अपनी स्किल में इज़ाफा नहीं कर पाए, सिर्फ उन्हीं की नौकरी गई है.
4 डिग्रियां हैं पर नौकरी 8 हज़ार की उत्तर प्रदेश के राजीव(बदला हुआ नाम) ने दिल्ली का रुख किया था ये सोच कर कि शायद यहाँ वो इज़्ज़त की एक नौकरी हासिल कर पाएंगे. सेल्स और मार्केटिंग का अनुभव है लेकिन नौकरी मिलती है 8-10 हज़ार की. शिक्षा के क्षेत्र में भी अनुभव है लेकिन इस रोज़गार मेले में इस क्षेत्र की कोई नौकरी ही नहीं थी. बी.एड, डबल एम.ए. और बी.कॉम किया हुआ है और इसके बावजूद कहीं किसी संस्थान पढ़ाने जाते हैं तो 8 हज़ार रूपये ऑफर किये जाते हैं. वो सवाल पूछते हैं कि आखिर आज के वक़्त में परिवार को इतने पैसे में कैसे पालें. दिल्ली जैसे शहर में किराये और बिजली के बिल में ही 8000रु खर्च हो जाते हैं.
सरकारी आंकड़ों के अनुसार बेरोज़गारी की दर बढ़ कर 5% पर पहुंच गई है जो 2013-14 में 4.9% थी.
'1 करोड़ नौकरियां कहां हैं' नौकरी की तलाश में हताश हो चुके ज्ञानविकास कहते हैं कि निराश तो मैं हूं ही. आज ही पढ कर आया कि नोटबंदी के बाद 15 लाख नौकरियां गई हैं लोगों की. जॉबलेस ग्रोथ हो रही है. सरकारी नौकरियां तो बनायीं ही नहीं जा रहीं. थोड़ा तनाव में कहते हैं कि इतनी बड़ी युवा आबादी निराशा में विस्फोटक हो सकती है. उनको सही दिशा देने की ज़रूरत है वरना निराशा में वो कुछ भी कर सकते हैं. मोदी जी ने चुनाव से पहले कहा था कि 1 करोड़ लोगों को नौकरी दूंगा... कहाँ हैं नौकरियां?
आंकड़ों के मुताबिक 2030 तक 1 करोड़ से ज़्यादा भारतीय हर साल नौकरी के लिए तैयार होंगे.
कंसल्टेंसी सर्विस वाले लू़ट रहे हैं एक लड़की ने बताया कि वो 3 साल से नौकरी ढूंढ रही है. कंसल्टेंसी सर्विस की धोखाधड़ी की शिकार भी हुईं. काफी पैसे गंवाए. इस धोखाधड़ी को लेकर वहां खड़े कई लोग बोलने लगे. किसी ने बताया कि कंसल्टेंसी सर्विस वाले 1200 या 2000 रूपये लेकर नौकरी दिलवाने का वादा करते हैं, बड़े-बड़े ऑफिस खोल कर बैठे होते हैं लेकिन कुछ दिन बाद वहां कुछ नहीं मिलता.
सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (CMIE) के नए आंकड़े बताते हैं कि इस साल जनवरी से अप्रैल के बीच 15 लाख नौकरियां चली गईं.
'फटी मार्कशीट देखकर मेरा दिल भर आया' एम्प्लॉयमेंट एक्सचेंज को लेकर भी लोग शिकायत करने लगे. मुकेश मीना ने बताया कि 2008 से उनका नाम एम्प्लॉयमेंट एक्सचेंज में दर्ज है पर कभी छोटी सी नौकरी के लिए भी फ़ोन नहीं आया. अपनी मार्कशीट दिखाते हुए राजीव ने कहा, "मेरी मार्कशीट एम्प्लॉयमेंट एक्सचेंज में फट चुकी है, इस पर तीन बार मुहर लगवा चुका हूँ. अब मैंने वहां जाना ही छोड़ दिया है क्योंकि अपनी मेहनत से कमाई हुई मार्कशीट का ये हाल होता देख मेरा दिल भर आया." 'स्किल इंडिया वेस्ट है' एक लड़के ने बताया कि कैफ़े की नौकरी छोड़ कर उसने स्किल इंडिया योजना पर भरोसा किया. 3 महीने बेसिक ट्रेनिंग भी नहीं मिली और सीधा कंपनी में भेज दिया गया. उसके बाद टारगेट पूरा नहीं किया कह कर 90 दिन बाद नौकरी से निकाल दिया जाता है. तनख़्वाह तक पूरी नहीं मिली. किसी ने बताया कि पहले आईटी की नौकरी के लिए बुलाते हैं. वहां इंटरव्यू के बाद कहते हैं कि आईटी की नौकरी नहीं है. डेटा एंट्री या कॉल सेंटर की नौकरी है. उस नौकरी में भी सिर्फ 8000 रूपये तनख्वाह है . रोज़गार मेले में भी आईटी के लिए एक ही काउंटर था.
लेबर ब्यूरो के आंकड़े बताते हैं कि साल 2012 से 2016 के बीच में रोज़गार वृद्धि धीमी हो गई है.
47000 लोगों ने इस मेले में रजिस्टर किया सरकार की मदद कर रही सीमा जोशी ने बताया कि सरकारी नौकरियां तो नहीं हैं लेकिन प्राइवेट कंपनियों के साथ मिलकर सरकार ने ये मेला आयोजित करवाया है. दो दिन के इस कार्यक्रम में 47 हज़ार लोगों ने रजिस्टर किया था. ऑन स्पॉट 8288 लोगों को नौकरियां दी गई हैं. उन्होंने बताया कि यहां एमबीए, एमसीए, बीटेक, एम.कॉम और अन्य पोस्ट ग्रेजुएट डिग्री के लोगों ने रजिस्टर करवाया था. हालांकि यहां पर एंट्री लेवल की नौकरियां ही ज़्यादा थी.

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एक करोड़ नौकरियां कब मिलेंगी?

akb दिल्ली के त्यागराज स्टेडियम में दिल्ली सरकार ने 7-8 नवंबर को रोज़गार मेला लगाया था. वहां लोगों की भीड़ देख कर समझ आया कि इसे स्टेडियम में आयोजित करने की ज़रूरत क्यों पड़ी. कई प्राइवेट कंपनियों के काउंटर्स वहां लगे थे और उनके सामने नौकरी की आस में युवाओं की लम्बी कतारें. बेरोज़गारी के आंकड़ें सामने दिखाई दे रहे थे. 'चपरासी की नौकरी के लिए भी तैयार हूं' ओडिशा के संजय कुमार बताते हैं कि वो 2013 से नौकरी की तलाश में हैं. पहले 2 साल भुवनेश्वर में नौकरी खोजी और थक-हार कर दिल्ली का रुख किया. यहाँ भी 2 साल से नौकरी के लिए मारे-मारे फिरते हैं. सरकारी नौकरी के लिए 15-20 फॉर्म भी भर चुके हैं. "ग्रेजुएट ही हैं तो चपरासी की नौकरी ही मिलेगी... रोज़ी-रोटी के लिए तो कुछ भी करना पड़ेगा." भाई की एक दुर्घटना में मौत होने के बाद माली हालत ठीक नहीं है और घर पर 3-4 लाख का क़र्ज़ भी है. माँ-बाप ने तो कहा था कि आगे पढ़ लो लेकिन घर के हालात देखते हुए खुद संजय ने ही मना कर दिया. .

3 दिन पहले भोपाल में केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने मीडिया के सामने कहा था कि जो लोग वक्त के साथ अपनी स्किल में इज़ाफा नहीं कर पाए, सिर्फ उन्हीं की नौकरी गई है.
4 डिग्रियां हैं पर नौकरी 8 हज़ार की उत्तर प्रदेश के राजीव(बदला हुआ नाम) ने दिल्ली का रुख किया था ये सोच कर कि शायद यहाँ वो इज़्ज़त की एक नौकरी हासिल कर पाएंगे. सेल्स और मार्केटिंग का अनुभव है लेकिन नौकरी मिलती है 8-10 हज़ार की. शिक्षा के क्षेत्र में भी अनुभव है लेकिन इस रोज़गार मेले में इस क्षेत्र की कोई नौकरी ही नहीं थी. बी.एड, डबल एम.ए. और बी.कॉम किया हुआ है और इसके बावजूद कहीं किसी संस्थान पढ़ाने जाते हैं तो 8 हज़ार रूपये ऑफर किये जाते हैं. वो सवाल पूछते हैं कि आखिर आज के वक़्त में परिवार को इतने पैसे में कैसे पालें. दिल्ली जैसे शहर में किराये और बिजली के बिल में ही 8000रु खर्च हो जाते हैं.
सरकारी आंकड़ों के अनुसार बेरोज़गारी की दर बढ़ कर 5% पर पहुंच गई है जो 2013-14 में 4.9% थी.
'1 करोड़ नौकरियां कहां हैं' नौकरी की तलाश में हताश हो चुके ज्ञानविकास कहते हैं कि निराश तो मैं हूं ही. आज ही पढ कर आया कि नोटबंदी के बाद 15 लाख नौकरियां गई हैं लोगों की. जॉबलेस ग्रोथ हो रही है. सरकारी नौकरियां तो बनायीं ही नहीं जा रहीं. थोड़ा तनाव में कहते हैं कि इतनी बड़ी युवा आबादी निराशा में विस्फोटक हो सकती है. उनको सही दिशा देने की ज़रूरत है वरना निराशा में वो कुछ भी कर सकते हैं. मोदी जी ने चुनाव से पहले कहा था कि 1 करोड़ लोगों को नौकरी दूंगा... कहाँ हैं नौकरियां?
आंकड़ों के मुताबिक 2030 तक 1 करोड़ से ज़्यादा भारतीय हर साल नौकरी के लिए तैयार होंगे.
कंसल्टेंसी सर्विस वाले लू़ट रहे हैं एक लड़की ने बताया कि वो 3 साल से नौकरी ढूंढ रही है. कंसल्टेंसी सर्विस की धोखाधड़ी की शिकार भी हुईं. काफी पैसे गंवाए. इस धोखाधड़ी को लेकर वहां खड़े कई लोग बोलने लगे. किसी ने बताया कि कंसल्टेंसी सर्विस वाले 1200 या 2000 रूपये लेकर नौकरी दिलवाने का वादा करते हैं, बड़े-बड़े ऑफिस खोल कर बैठे होते हैं लेकिन कुछ दिन बाद वहां कुछ नहीं मिलता.
सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (CMIE) के नए आंकड़े बताते हैं कि इस साल जनवरी से अप्रैल के बीच 15 लाख नौकरियां चली गईं.
'फटी मार्कशीट देखकर मेरा दिल भर आया' एम्प्लॉयमेंट एक्सचेंज को लेकर भी लोग शिकायत करने लगे. मुकेश मीना ने बताया कि 2008 से उनका नाम एम्प्लॉयमेंट एक्सचेंज में दर्ज है पर कभी छोटी सी नौकरी के लिए भी फ़ोन नहीं आया. अपनी मार्कशीट दिखाते हुए राजीव ने कहा, "मेरी मार्कशीट एम्प्लॉयमेंट एक्सचेंज में फट चुकी है, इस पर तीन बार मुहर लगवा चुका हूँ. अब मैंने वहां जाना ही छोड़ दिया है क्योंकि अपनी मेहनत से कमाई हुई मार्कशीट का ये हाल होता देख मेरा दिल भर आया." 'स्किल इंडिया वेस्ट है' एक लड़के ने बताया कि कैफ़े की नौकरी छोड़ कर उसने स्किल इंडिया योजना पर भरोसा किया. 3 महीने बेसिक ट्रेनिंग भी नहीं मिली और सीधा कंपनी में भेज दिया गया. उसके बाद टारगेट पूरा नहीं किया कह कर 90 दिन बाद नौकरी से निकाल दिया जाता है. तनख़्वाह तक पूरी नहीं मिली. किसी ने बताया कि पहले आईटी की नौकरी के लिए बुलाते हैं. वहां इंटरव्यू के बाद कहते हैं कि आईटी की नौकरी नहीं है. डेटा एंट्री या कॉल सेंटर की नौकरी है. उस नौकरी में भी सिर्फ 8000 रूपये तनख्वाह है . रोज़गार मेले में भी आईटी के लिए एक ही काउंटर था.
लेबर ब्यूरो के आंकड़े बताते हैं कि साल 2012 से 2016 के बीच में रोज़गार वृद्धि धीमी हो गई है.
47000 लोगों ने इस मेले में रजिस्टर किया सरकार की मदद कर रही सीमा जोशी ने बताया कि सरकारी नौकरियां तो नहीं हैं लेकिन प्राइवेट कंपनियों के साथ मिलकर सरकार ने ये मेला आयोजित करवाया है. दो दिन के इस कार्यक्रम में 47 हज़ार लोगों ने रजिस्टर किया था. ऑन स्पॉट 8288 लोगों को नौकरियां दी गई हैं. उन्होंने बताया कि यहां एमबीए, एमसीए, बीटेक, एम.कॉम और अन्य पोस्ट ग्रेजुएट डिग्री के लोगों ने रजिस्टर करवाया था. हालांकि यहां पर एंट्री लेवल की नौकरियां ही ज़्यादा थी.

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