Sarvapriya Sangwan

My Poetry

अंत

akb   हमारे सबसे गहरे प्रेम की स्मृतियां जब होने लगती हैं ज़ेहन से गायब रबर लेकर कागज़ से सब मिटा दिया गया जैसे कालस में डूबे मृत अक्षर पढ़ने की नाकाम कोशिश के बाद फिर उभरता है एहसास अपने औसत प्रेमी होने का यकीन जानिए इससे अच्छा अंत कुछ नहीं इससे बुरा अंत कुछ नहीं

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अंत

akb   हमारे सबसे गहरे प्रेम की स्मृतियां जब होने लगती हैं ज़ेहन से गायब रबर लेकर कागज़ से सब मिटा दिया गया जैसे कालस में डूबे मृत अक्षर पढ़ने की नाकाम कोशिश के बाद फिर उभरता है एहसास अपने औसत प्रेमी होने का यकीन जानिए इससे अच्छा अंत कुछ नहीं इससे बुरा अंत कुछ नहीं

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