Sarvapriya Sangwan

My Poetry

कसक

akb दिल में कई कसक लिए बैठे हैं कुछ यूं ही तो कुछ के सबब लिए बैठे हैं कहने को तो नहीं था कहना मुश्किल पर अलफ़ाज़ ये किसी की तलब लिए बैठे हैं

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